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Atthavis Buddha Paritran Path|अठ्ठाविस बुद्ध परित्राण पाठ

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        अठ्ठाविस बुद्ध परित्राण पाठ तण्डंह्करो महाविरो मेधंकरो महायशो सरणं करो लोकं हितो, दिपड् करो जुतिन्धरो कोण्ड ञ्ञो जनप्पमक्खो , मंड्गंलो परिस्सत्थो, सुमनो, धिरो रेवती रतिवठ्ठनो  शोभितो गुण सम्पन्नो, अनोमदस्सी जनुत्तमो पदमोलोके पज्जोतो, नारदा वर सारथी, पथुतरो सब्ब लोकय्यो, प्रियदर्शी  नरासमो अत्थदेस्सी कारुणीको धम्मदस्सी तमोनुदो सिद्धात्थो आसय्यो, लोकहिथो वरदसंवरो फुस्सोवरद सम्बुद्धो विपसी च अनुपमो शिखि सब्ब हितो, विस्सभू सूखदायकंं,सब्ब हितो सत्था वस्स भु सुख दायको||

Ratan sutta and it's Marathi meaning | रतन सुत्त व मराठी अर्थ

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                      रतन सुत्त यानीध भूतानी समागतानि| भूम्मानि वा यानी व अन्तलिखे|तथागतं देवननुस्सपूजितं|बुद्ध नमस्साय सुवत्थि होन्तु||१|| यानीध भूतानी समागतानि| भूम्मानि वा यानी व अन्तलिखे|तथागतं देवननुस्सपूजितं|धम्म नमस्साय सुवत्थि होन्तु||२|| यानीध भूतानी समागतानि| भूम्मानि वा यानी व अन्तलिखे|तथागतं देवननुस्सपूजितं|संघ नमस्साय सुवत्थि होन्तु||३|| यानीध भूतानी समागतानि| भूम्मानि वा यानी व अन्तलिखे|सब्बेवभूता सुमना भवन्तु अथोपि सक्कच सुणन्तु भासितं||४||तस्मा हि भूता निसामेथ सब्बे| मेत्तं करोथ मानुसिया पजाय|दिवा रत्तोच हरन्ति ये बलिं|तस्माहि ने रक्खथ अप्पमत्ता||५|| य किञ्चि वित्त इधं वा हूंर वा| सग्गेसु वा यं रतनं पणीतं | न नो समं अत्थि तथागतेन| इदम्पि बुद्धे रतनं पणीत|एतेन सच्चन सुवत्थि होतुं||६|| खयं विरांग अमतं पणीतं|यदज्झगा साक्यमुनी समाहितो न तेन समात्थि किंञ्चि| इदम्पि धम्मे रतनं पणीतं|एतेन सच्चेन सुवत्थि होतुं||७|| यं बुद्धसेट्ठो परिवण्मयि सुचिं|  समाधिमानन्तरिकञ्ञमाहू| समाधिना तेन सभो न विज्जति| इदम्पि धम्म...

Mahamangal Sutta and it's Marathi meaning|महामंङ्गल सुत्त व अर्थ

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               महामङ्गल सुत्त  एवं मे सुतं |एकं समयं भगवा सवात्थियं विहरित जेतवने अनाथ पिण्डिकस्स आरामे | अथ खो अञ्ञतरा देवता अभिक्कन्ताय रत्तिया अभिकन्तवण्णा केवलकप्पं जेतवनं ओभासेत्वा | येन भगवा तेनुपङकमि, उपसङकत्मित्तवा भगवंन्त अभिवादेत्वा एकमन्तं आठ्ठासि | एकमन्तं ठ्ठिता खोसा देवता भगवन्त गाथाय अज्झाभासि:-               बहू देवा मनुस्सा च, मग्ङलानि अचिन्तयुं |               आकङखमाना सोत्थानं,ब्रुंहि मग्डलमुत्तमं||१||               असवेनाच बालनं, पण्डितानञ्च सेवना|               पूजा चं पूजानियानं,एतं मग्ङलमुत्तमं||२||               पति रुप देसवासे च,पुब्बे च कतपुञ्ञता |               अत्सम्पापणिधि च,एतं मग्ङलमुत्तमं||३||               बाहुसच्च ञ सिपच्च विनञयो च सुसिक्खितो |   ...

Karaniymetta Sutta and it's Marathi meaning | करणीयमेत्त सुत्त व अर्थ

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               करणीयमेत्त सुत्त                              करणीयमत्थकुसलेन,                          यन्तं सन्तं पदं अभिसमेच्च|                             सक्को उजू च सूज च,                         सूवाचो चस्स मृदू अनातिमानी||१||                             सन्तुस्सको च सुभारो च,                        अप्प किच्चो च सलूहुकवुत्ति|                             सन्तिन्द्रियोच निपको च,                        अप्पगब्धो...

Parabhav sutta and it's Marathi meaning | पराभव सुत्त व मराठी अर्थ

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                    पराभव सुत्त   एवं मे सुतं | एकं समयं भगवा सवात्थियं विहरित जेतवने अनाथ पिण्डिकस्स आरामे | अथ खो अञ्ञतरा देवता अभिक्कन्ताय रत्तिया अभिकन्तवण्णा केवलकप्पं जेतवनं ओभासेत्वा | येन भगवा तेनुपङकमि, उपसङकत्मित्तवा भगवंन्त अभिवादेत्वा एकमन्तं आठ्ठासि | एकमन्तं ठ्ठिता खोसा देवता भगवन्त गाथाय अज्झाभासि |                    पराभवन्त पुरिसं मयं पुच्छाम गोतमं|                भगवन्तं पुट्ठमागम्म, किं पराभवतो मुखं||१||                    सुविज्जानो भवं होति, सुविजानो पराभवो|                धम्मकामो भवं होति, धम्मोदस्सो पराभवो||२||                    इति हेतं विजानाम, पठमो सो पराभवो|                 दुतियं भगवा ब्रुही, किं पराभवो मुखं||३|| ...

Murti pratishthpana gatha and it's Marathi meaning | मूर्ती प्रतिष्ठापना गाथा व मराठी अर्थ

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              मूर्ती प्रतिस्थापना इदं बुद्धं बिम्ब सब्बेहि देवं, मनुस्सेहि पुजेतुं| इसस्मि विहारे पतिठ्ठापेमी इदं मे पुञ्ञं | बोधिञ्ञाणं पटिलाभीय सवत्ततुं||१|| तीन वेळा म्हणावे                    मराठी इथे विहारत आम्ही भगवान बुद्धाच्या या मूर्तीची प्रतिस्थापना करित आहोत. विहारत येऊन श्रध्देने सर्व उपासक/उपासिकांनी पूजा करावी. या प्रतिस्थापनेमुळे आम्हाला कुशल कर्माचा व बोधी ज्ञानाचा लाभ व्हावा असा संकल्प करीत आहोत.

Aahar Pooja and it's Marathi meaning | आहार पुजा व अर्थ

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              आहार पुजा  सम्मासम्बुध्द ञाणो यो, तिलोके पच्चायारहो | स नाथो परिगणहातु , भोजनं मधुरं इमं ||१|| आदिवासेंतु नो भन्ते, भोजनं परकप्पितं  अनुम्प उपादाय , पट्टिगण्हातु मुत्तमं||२||               मराठी अर्थ  सम्यक, संबुध्द, भगवान बुध्दाची तिन्ही लोकी नाना प्रकारे पुजा केली जाते. मी सुध्दा या उत्तम व प्राणीत भेजनाने त्याची पुजा करतो. हे भगवान ! आमच्या या पुजेचा आपण स्विकार करावा||१|| भन्ते ! आम्ही पुढे ठेवलेल्या उत्तम भोजनाचा आपण कृपा करून स्वीकार करावा||२||